जरूरत है एक सोच बदलने की

क्या आपने सोचा है कि हमारी सोच कैसे काम करती है और हम उस सोच के अनुसार कैसे काम करते हैं । आजकल भागदौड़ वाली जीवन में हम खुद को भूल से गए हैं कि जब समय आता है तो हमारा अपने आप पर नियंत्रण ही नहीं रहता । यह सब बातें हमारी सोच पर निर्भर करती है । कि हम परिस्थिति आने पर किस तरह की प्रतिक्रिया देते हैं । उत्तम स्वास्थ्य के लिए कहा गया है कि उत्तम शरीर में अच्छा मस्तिष्क रहता है । जिनका स्वास्थ्य अच्छा है उनकी बुद्धि की क्षमता भी अधिक गई है । यदि आपको कहा जाए कि आप एक टूटे-फूटे मकान में रहे,  क्या आप रहना चाहोगे !

वैसे ही ज्ञान की देवी सरस्वती ऐसे शरीर में क्यों रहना पसंद करेंगी जो बीमार हो , कमजोर हो । वही बुद्धिमान हो सकता है और बुद्धि का प्रयोग कर सकता है जो स्वस्थ है । स्वस्थ रहने के लिए हमें बहुत ज्यादा प्रयास की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि स्वस्थ रहना हमारे शरीर का धर्म है । “ स्वस्थ” का अर्थ भी यही है स्वयं में स्थित होना ।  अर्थात अपने आप में बने रहना । इसीलिए स्वस्थ और  सकारात्मक मस्तिष्क के लिए पहले स्वस्थ शरीर रखना आवश्यक है । क्योंकि शारीरिक और मानसिक स्तर एक दूसरे से जुड़े हैं ।

यदि आप शारीरिक रूप से आहत होते हो तो मानसिक रूप से भी असर होगा, मानसिक स्तर से आहत हो तो शारीरिक रूप से भी लक्षण प्रकट होंगे जैसे – बेचैनी, थकान, भूख न लगना आदि कई । हमारी संस्कृति में हमें बहुत कुछ दिया है आज वर्तमान समय में जरूरी है कि हम उनको जाने यह न केवल हम पर ही काम करता है इसका असर हमारे परिवार, समाज आदि पर भी होता है ।

जो व्यक्ति अपने सकारात्मक विचारों के साथ चलता है एवं भावनाओं पर नियंत्रण रखता है वह अपने सारे काम कुशलतापूर्वक कर लेता है । सही सोच सही रास्ता दिखाती है क्योंकि हम जैसा सोचते हैं वैसा ही बनाते हुए चलते हैं । सही सोच हमारी सही शुरुआत करती है इसलिए जरूरी है कि हम अपनी सोच बदलें एक ऐसी सकारात्मक सोच लेकर आएं जो हमें सही काम की प्रेरणा दे और हमारे काम में कुशलता लाए । एक पुरानी कहावत भी है की शरीर में स्वस्थ मन भी रहता है ।

वर्तमान समय में यह कहावत पूर्ण रूप से सिद्ध हुई है एवं इसका दूसरा पक्ष भी उतना ही सही है हमारा शारीरिक स्वास्थ्य बहुत अधिक सीमा तक मानसिक स्थितियों पर निर्भर करता है । तनाव स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालता है । तनाव में आया हुआ व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को कई तरह से प्रभावित करता है जैसे उसके हार्मोन में बदलाव होना, नर्वस सिस्टम में एवं पाचन संबंधी भी कहीं बदलाव देखने को मिलते हैं । हमारे स्वास्थ्य के लिए मानसिक स्थितियां हमारे मस्तिष्क, अंत स्रावी तंत्र, प्रतिरक्षा तंत्र एवं तंत्रिका तंत्र यह सब एक दूसरे से प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से जुड़कर कार्य करते हैं । इनकी अंतर क्रिया हमारे स्वास्थ्य को प्रदर्शित करती है ।

स्वास्थ्य के लिए दी गई है परिभाषा कोई नई नहीं है क्योंकि क्योंकि शारीरिक , मानसिक और आध्यात्मिक एवं सामाजिक यह सभी स्तर हमारे स्वास्थ्य के लिए कार्य करते हैं । योग विज्ञान में बताए गए आसन, प्राणायाम एवं ध्यान मन और शरीर दोनों के साधन बताए गए हैं । कई शोधों से भी यह पता चला है कि नियमित एवं विधि पूर्वक योग करने से हमारा शरीर शारीरिक एवं मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है ।
आपका मस्तिष्क रोज काम को करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । आपकी प्रतिक्रिया की क्षमता, समझने की क्षमता, महसूस करने की क्षमता एवं अच्छा करने की क्षमता यह सब आपके मस्तिष्क की सेहत से जुड़े हैं । कई बार हम यह समझ ही नहीं पाते की शरीर के साथ मस्तिष्क को भी पोषण व ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

जिस प्रकार शारीरिक स्वास्थ्य के लिए व्यायाम किया जाता है उसी प्रकार बुद्धि को भी बल देने के लिए मानसिक रूप से योग में ध्यान व प्राणायाम की क्रिया की जाती है । ज्यादातर लोग सोचते हैं कि ध्यान तनाव कम करने के लिए होता है । ध्यान मस्तिष्क में रक्त के पवाह को बढ़ाता है। नियमित रूप से ध्यान करने पर मस्तिष्क की संरचना में बदलाव देखा गया है । इससे स्मरण शक्ति एवं एक साथ कार्य करने की क्षमता, एकाग्रता को बढ़ाता है । ध्यान मस्तिष्क के कई भागों को सक्रिय करता है जोकि निर्णय लेने, सजगता, एकाग्रता एवं सीखने की क्रिया से जुड़ा है इसीलिए ध्यान मस्तिष्क के लिए शक्ति कारक है । इसलिए इन्हें कुछ समय दे और स्मार्ट लाइफ जिए ।

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4 Responses

  1. मनोज कुमार says:

    बहुत ही ज्ञानवर्धक आलेख

  2. Harish says:

    Very Informative and helpful article.

  3. Shobha says:

    Wonderful,well explained

  4. Naveen sharma says:

    Very Good Article, life thinked great nd beneficial…. It Article is life improved, thanku so much

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