Heartfelt Condololences to Janaab Rahat Indori Sahab

नफरत के इस दौर में शायद जीते-जीते ऊब गया …
नज्मों की दुनिया का एक सूरज आज डूब गया …

ये बहते हुए दरिया भी अचानक मुड़ जाएं ,
वो एक लिहाफ़ मैं ओढ़ लूँ तो सर्दियां उड़ जाएं …
बिखर-बिखर सी गई है किताब साँसों की ,
कौन जाने ये कागजात कब कहाँ उड़ जाएं …

इस सदी के सबसे अज़ीम और खुदरंग शायर मरहूम राहत इन्दौरी साहब को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि 💐

आपकी नज़्में , आपकी गजलें , आपके कलाम हिंदुस्तान की फिजाओं में सदियों तक गूंजते रहेंगे राहत साहब क्योंकि शायर कभी मरा नहीं करते वो हमेशा लफ्ज़ों में ज़िन्दा रहते हैं

अलविदा राहत साहब … अल्लाह आपकी बेशकीमती रूह को जन्नत अता फरमाए

आमीन !

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *