“तथाकथित” भक्त-चित्रण

तो अयोध्या में राममंन्दिर का शिलान्यास हो गया!

मा. प्रधानमंत्री जी के करकमलों द्वारा! दो एक साल में भव्य मंदिर भी बनकर तैयार हो जायेगा! देश में रामराज्य आये….जैसा लोग चाहते हैं…

लेकिन कल से इस देश की एक बड़ी जनसंख्या काफी उत्साहित है….मंदिर को लेकर! होना भी चाहिए! क्योंकि एक ऐसे विवाद का अंत हुआ है जिसका असर देश की राजनीति पर दशकों तक रहा है! कई प्रमुख मुद्द्दे इसकी भेंट चढ़ गए! शायद अब थोड़ी स्थिरता आये!

ये लोग सच्चे रामभक्त हैं! श्रीराम को जानते हैं! पूजते हैं!

लेकिन इसी जनसंख्या में एक ऐसी भी प्रजाति है, जिसे राम से कोई लेना देना ही नहीं है! ये लोग अलग ही लेवल पर उत्साहित हैं!

इतने ज्यादा उत्साहित है कि कल से अपनी ही पूंछ में आग लगाए घूम रहे हैं और जो मिल जा रहा है उसको छुवा दे रहे हैं! ये लोग विरोधियों को बर्नोल बाँट रहे है!

सालों तक इस प्रजाति के व्यवहारों का गहन अध्ययन किया है मैंने! आज इनके कुछ लक्षणों को आपके सामने रखना चाहूंगा! ध्यान दीजियेगा…

हर गांव में दर्जन भर ऐसे लड़के पाये जाते हैं! पढाई -लिखाई में भले लुल्ल होंगे, लेकिन भौजाइयों के बीच बेहद लोकप्रिय होते हैं!

गांव की औरतों को मायके छोड़ना, बूढी दादी को बैंक में ड्राप करना, बुढऊ लोगों के लिए खैनी-बीड़ी जुगाड़ करना, पूरे गांव का एलपीजी सिलिंडर भरवाना और कीचड़ में फंसे ट्रैक्टर को तबतक निहारना जब तक वो बाहर न निकल जाये- ये इनके मुख्य काम हैं!

प्राचीनकाल में गांव की भौजाइयों के लिए 10 रूपये का स्क्रेच कार्ड खरीद कर लाना भी इन्ही की जिम्मेदारी थी! सावन में जामुन तोड़कर बुआ लोगों तक पहुँचाना इनका सीजनल काम है!

इन्हें कैसे पहचानेंगे आप?

बेहद आसान है! ये लोग हमेशा दांत चियारे मिलेंगे! कोई बड़ा दिख गया तो पांव छूकर हाथ को सीने से लगाएंगे! हमउम्र मिल गया तो हाथ मिलाकर हाथ को सीने से लगाएंगे! इनके दोनों हाथों की कानी ऊँगली पर नेलपॉलिश चढ़ा होता है और गले में 5 रूपये की एक सुनहरी माला होती है जिसका जो शर्ट के बाहर निकली होती है!

ये लोग हमेशा पास वाले नुक्कड़ पर मिलेंगे….25 रुपया वाला Bayban का चश्मा लगाये हुए! पान से लगायत परचून और बेकरी से लेकर चाट वाले तक- सब इनको पहचानते हैं!

उस चौक पर एक बैनर हमेशा टँगा रहता है जिसमें हाथ जोड़े और वही 25 रुपया वाला चश्मा लगाये हुए इनका फोटो चिपका रहेगा! नए साल से लेकर रक्षाबंधन और गणतंत्र दिवस से लेकर पोंगल- सभी त्योहारों की बधाई एक साथ लिखी होती है उसमें!

गांव में कोई मर मुरा गया तो बांस बल्ली फाड़ने सबसे पहले यही पहुँचते हैं! दुनिया भर के टोटके मालूम होते हैं इन्हें…सिवाय हाइड्रोक्लोरिक एसिड के केमिकल फॉर्मूले के! निम्बू पर सिंदूर डला है तो नहीं लांघना है!

शादी विवाह मुंडन जनेऊ जैसे शुभ अवसरों पर ये लोग रनिवास में ही मिलेंगे! इनको सारी बातें तभी याद आती हैं जब फुल्ल भोलूम में DJ बजना स्टार्ट होता है! बड़े से स्पीकर के पास जाकर मोबाइल पर बात करते हैं….पता नहीं कैसे!

स्टेज पर खड़ा गायक जैसे ही आलाप लेता है, ये उसको इनाम देने स्टेज पर चढ़ जाते हैं! मुंह में दस रुपये का नोट दबाकर स्टेज पर नाचती हुई लड़कियों को पकड़ाने वाली यह प्रजाति सबसे लास्ट में भोजन ग्रहण करती है! आयोजन भले किसी के यहाँ हो रहा हो! लड़की/लड़के के बाप से ज्यादा बीजी रहते हैं ये लोग!

सारा टेबल खाली रहेगा….लेकिन खाएंगे कुर्सी पर पत्तल रखकर! ये इनका भौकाल है! भूख लगी है….अब लगता है जान निकल जाएगी….बोल बोल के परेशान कर देंगे! पत्तल भर खाना लेकर जब खाने बैठेंगे तो दो पूडी के बाद बम्म बोल जायेंगे!

कारण? मुंहवे नहीं खुल रहा! अब दिन भर में इतना कमला पसन्द खाएंगे तो मुंह किधर से खुलेगा?

बेहद आज्ञाकारी और हर वक्त पड़ोस के रेलवे स्टेशन पर पायी जाने वाली यह प्रजाति जब मंदिर जाती है तो चार जगह चंदन लगाती है- सर, दोनों कान और कंठ!

पूजा सम्पन्न होने के बाद इन्हें पंजीरी बाँटने का तगड़ा अनुभव होता है! हमेशा दाहिने हाथ पर देते हैं! आरती के वक्त जस्ट भगवान की मूर्ति के बरोबर में खड़े मिलते हैं …..माथे पर एकरँगा बांधे, जिसपर “जय माता दी” लिखा होता है!

इन्हें अपने जिले में आयोजित होने वाले हर भंडारे के बारे में पता होता है! वही इनका असली जलवा निकल कर बाहर आता है!

भण्डारा खिलाने के वक्त ये प्रजाति भौजाइयों पर ….मेरा मतलब, उनकी पत्तल पर कड़ी नजर रखते हैं! कभी कभी भौजाइयों के लिए ये लोग स्पेशल एंट्री पास का काम करते हैं!

भंडारे से ये लोग वही आइटम उठाते हैं जिसकी सबसे ज्यादा डिमांड हो! मसलन …..पूड़ी! बूढ़े-बुढ़िया-बच्चे मांग मांग के मर जाएँ नहीं देंगे! …..और युवतियों और भौजाइयों का पत्तल खाली नहीं होने देंगे!

ये इतने अटेंशन सीकर होते हैं कि दिन में दस बजे संडास के लिए निकलते हैं…..पेप्सी की दो लीटर वाली बोतल लेकर!

And last, but not the least——-

दोस्त की बाइक लेकर मेला देखने जाते हैं और चाभी हाथ में देते ही बोलते हैं….भाई! बाइक सर्विसिंग मांग रही है!

ऐसी प्रजाति को शुद्ध भाषा में हम “……” कहते हैं!

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